सोमवार 21 जुलाई, 1969 को बहुत सवेरे ईगल नामक चंद्रयान नील आर्मस्ट्रांग और एडविन एल्ड्रिन को लेकर चंद्रतल पर उतर गया। चंद्रयान धूल उड़ाता हुआ चन्द्रमा के जलविहीन 'शांत सागर' में उतरा। भारतीय समय के अनुसार एक बजकर सैंतालीस मिनट पर किसी अन्य ग्रह पर मानव पहली बार पहुँचा। असीम अंतरिक्ष को चीरते हुए पृथ्वी से चार लाख किलोमीटर दूर चंद्रमा पर पहुँचने में मानव को 102 घंटे 45 मिनट और 42 सेकण्ड समय लगा। अपोलो-11 को केप केनेडी से बुधवार, 16 जुलाई, 1969 को छोड़ा गया था। इसमें तीन यात्री थे - कमाण्डर नील आर्मस्ट्रांग, माइकल कालिंस और एडविन एल्ड्रिन। चन्द्रमा की कक्षा में चंद्रयान मूलयान कोलम्बिया से अलग हो गया और फिर चंद्रतल पर उतर गया। उस समय माइकल कालिंस मूलयान में 16 किलोमीटर की ऊँचाई पर निरन्तर चन्द्रमा की परिक्रमा कर रहे थे। नील आर्मस्ट्रांग ने चंद्रतल से पृथ्वी का वर्णन करते हुए कहा कि यह बहुत बड़ी, चमकीली और सुन्दर (बिग, ब्राइट एवं ब्यूटीफुल) दिखाई दे रही है। एल्ड्रिन ने भावविभोर होकर कहा - सुन्दर दृश्य है, सब कुछ सुन्दर है। उसने कहा कि जहाँ हम उतरे है, उससे कुछ ही दूरी पर हमने बैंगनी रंग की चट्टान देखी है। चन्द्रमा की मिट्टी और चट्टानें सूर्य की रोशनी में चमक रही है। यह एक भव्य एकांत स्थान है। चंद्रयान ठीक स्थिति में है, यह निरीक्षण करके, कुछ खा-पीकर सुस्ता लेने के बाद नील आर्मस्ट्रांग चंद्रयान से बाहर निकले। चंद्रयान की सीढ़ियों से धीरे-धीरे वह नीचे उतरे। उन्होंने बायाँ पाँव चंद्रतल पर रखा, जबकि दायाँ पाँव चंद्रयान पर ही रहा। इस बीच आर्मस्ट्रांग दोनों हाथ से चंद्रयान को अच्छी तरह पकड़े रहे। उन्हें यह तय कर लेना था कि वैज्ञानिक चंद्रतल को जैसा समझते रहे है, वह उससे एकदम भिन्न तो नहीं है। आश्वस्त होने के बाद वह यान के आस-पास ही कुछ कदम चले। चंद्रतल पर पाँव रखते हुए उन्होंने कहा, यद्यपि यह मानव का छोटा-सा कदम है, लेकिन मानवता के लिए यह बहुत ऊँची छलाँग है। अभी तक एल्ड्रिन भले ही भीतर बैठा हो, लेकिन वह निष्क्रिय नहीं था। उसने मूवी कैमरे से आर्मस्ट्रांग के चित्र लेने शुरू कर दिये थे। बीस मिनट बाद ही एडविन एल्ड्रिन भी चंद्रयान से बाहर निकले। उन्होंने भी चंद्रतल पर चलकर देखा। तब तक आर्मस्ट्रांग चंद्रधूल का एक तात्कालिक नमूना जेब में रख चुके थे। अब उन्होंने टेलीविजन कैमरे को त्रिमाद पर जमा दिया।
जन्म - 1478 ई०
जन्म-स्थान - रूनकता
मृत्यु - 1583 ई०
मृत्यु-स्थान - पारसोली
भाषा - ब्रजभाषा
रचनाएँ - सूरसागर, साहित्यलहरी, सूरसारावली।


जन्म - 1532 ई०
जन्म-स्थान - राजापुर
मृत्यु - 1623 ई०
मृत्यु-स्थान - काशी
भाषा - ब्रजभाषा, अवधी
रचनाएँ - रामचरितमानस, दोहावली, कवितावली, गीतावली, जानकी मंगल, पार्वती मंगल, विनय पत्रिका, बरवै रामायण, कुण्डलिया रामायण, रामलला नहछू, वैराग्य संदीपनी, रामाज्ञा प्रश्न।


जन्म - 1548 ई०
जन्म-स्थान - दिल्ली
मृत्यु - 1628 ई०
मृत्यु-स्थान - ब्रज
भाषा - ब्रजभाषा
रचनाएँ - सुजान रसखान, प्रेम वाटिका।


जन्म - 1603 ई०
जन्म-स्थान - बसुआ गोविंदपुर
मृत्यु - 1663 ई०
मृत्यु-स्थान - UNKNOWN
भाषा - ब्रजभाषा
रचनाएँ - बिहारी सतसई।